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Introduction to the origin and evolution of life and its classification

Nios Class 12th Biology Chapter 1st

जीव विज्ञान

पाठ-1

जीवन की उत्पत्ति एवं विकाश और वर्गीकरण से परिचय

 

प्र०-1 प्रजनन किसे कहते है? विस्तार से समझाइए

उत्तर- वह जैविक प्रक्रिया जिसमे कोई जीव अपने जैसी संतान की उत्पत्ति करता है। यह प्रकियाँ प्रजाति को निरन्तर बनाये रखने के लिए आवश्यक है।

प्रजनन के प्रकार                                                   

Nios Class 12th Biology Chapter 1st
Nios Class 12th Biology Chapter 1st

प्रजनन मुख्य रूप से तीन प्रकार के होते हैं।

① अलैगिक प्रजनन – (Reproduction)

② लैंगिग प्रजनन – (Sexual Reproduction)

③ कार्यिक जनन – (vegetative Reproduction)

1.अलैंगिक प्रजनन : अलैंगिक प्रजनन एक कोशिकीय जीवो के साथ-साथ कुछ पौधो मे होता है।

इसको मुख्य बिन्दु है |

1. इसमे मुख्य रूप से एक ही जनक होता है।

2. जो संतान जन्म लेती है व जनक के समान होती है।

अलैंगिक प्रजनन के प्रकार

अलैगिक प्रजनन मुख्य रूप से 5 प्रकार होते है।

  1.  विभाजन (Fission)
  2.  द्विखण्डन
  3.  बहु‌खण्डन
  4.  कली बनना (Budding)
  5.  खण्डन (Fragmention)
  6.  बीजाणु जनन (Spore formation)
  7. वनस्पति प्रजनन (vegetative propagation)

 

② लैंगिंग प्रजनन

यह प्रजनन उच्च विकसित जीवो मे पाया जाता है इसमे नर व मादा के बीच होने वाली प्रक्रिया है। इसमे युग्मको का निर्माण और निषेचन होता है।                                                                                   

 Sexual Reproduction
Sexual Reproduction

 लैंगिक प्रजनन की अधोलिखित अवस्था से होती है।

① युग्मको का निर्माण (Gametogenesis)

② निषेचन (Fertilization)

(3) युग्मनज का निर्माण

④ भ्रूण का विकाश

⑤ जन्म

(3) कायिक जनन :-जड़, पत्ती के द्वारा नये पौधे को जन्म दिया जाता है, इसे कायिक जनन या वर्धी जननं कहते हैं।

कायिक जनन के प्रकार

 Sexual Reproduction
कायिक जनन
  •  प्राकृतिक जनन व
  •  कृत्रिम जनन

 

① प्राकृतिक कायिक जनन:-इसमे प्राकृतिक रूप से स्वतः ही पौधो का रुपान्तरित भाग या कायिक प्रवर्थ अंकुरित होकर नये पौधे के रूप मे नये पौधे का जन्म होता है| यह निम्न प्रकार सम्पन्न होता है।

1.जडो के द्वारा कायिक जनन :-जब कोई पौधा अपनी जड़ो के द्वारा हूँ-ब हूँ अपने समान पौधे को जन्म देता है।
तो इसे जड़ो के द्वारा होने वाला कायिक जनन कहते है

उदाहरण – शकरकन्द

2. तनो के द्वारा होने वाला कायिक जनन:-इसमे तनो के द्वारा स्वत प्राकृतिक रूप से जनन होता है ।

उदाहरण – अदरक, आलू, हल्दी

3. पत्ती के द्वारा होने वाला कायिक प्रजनन: इसमे पत्ती के द्वारा समान पौधे का जन्म होता है।

उदाहरण – अजूबा

 

प्र० 2 जीवन अवधि क्या है ? विस्तार से समझाइए

उत्तर – जीवन : किसी मनुष्य या जीव के जन्म से मृत्यु तक का समय परन्तु इनकी मृत्यु प्राकृतिक हो । इसे ही जीवन अवधि कहते हैं। मनुष्य की जीवन अवधि 70 से 75 वर्ष मानी जाती है।

कुछ जीवो का जीवन काल निम्न है।

  1. मनुष्य का जीवन 70 से 75 वर्ष
  2. कुत्ता का जीवन 20 से 25 वर्ष
  3. गाय का जीवन 20 से 25 वर्ष
  4. घोडे का जीवन 50 से 55 वर्ष 
  5. हाथी का जीवन 65 से 70 वर्ष 

प्र०3- अलैंगिक जनन को विस्तार से समझाइसे

उत्तर – अलैंगिक जनन मे जो संतान उत्पन्न होती है। वह एक दम अपने जनक के समान होती है। अलैंगिक जनन को एकल जीव जनन भी कहते है।

अलैंगिक जनन की विधियाँ:  अलैगिक जनन की 6 विधियाँ है।

  1. द्वि विखण्डन (Binary fission)
  2. बीजाडु जनन (Sporilation)
  3.  मुकुलन (Budding)
  4.  कालका (Gemmules)
  5. खंडीभवन (fragmentation)
  6.  पुनरुद‌भवन (Regeneration)

① द्विविखण्डन (Binary fission) :-इसे द्विविभाजन भी कहते है। इस एक इस विधि में जनन के समय जनक का शरीर समसूत्री विभाजन के द्वारा दो भागो मे बट जाता है। तथा दो संतानो की प्राप्ति होती है।

②बीजाडु जनन – (sporulation) इस विधि के द्वारा जनन के समय जीवो की कोशिका मे या बाहरी भाग मे एक कोशिकीय पतली आवरण (भित्ति) युक्त संरचना बनती है। इसे ही वीजाणु कहा जाता है। इस बीजाणु के द्वारा कुछ समय बाद पौधे से अलग होकर विभिन्न स्थानो पर जाकर या फैलकर नये जीवो का निर्माण करता है। इस प्रक्रियाँ को ही वीजाणु जनन कहते है |

उदाहरण- क्लैमिडो मोनास , शैवाल, आदि

(3) मुकुलन (Budding)– मुकुलन यीस्ट (खमीरा में पाया जाता है) इस विधि मे यीस्ट कोशिका के बाहय भाग पर पाया जाता हैं | ये जनन के समय बहुत सूक्ष्म है होते हैं इसे ही मुकुलन कहा जाता है। यही मुकुल यीस्ट से अलग होकर कुछ समय बाद नये यीस्ट का निर्माण करते हैं।

④ कालका (Gemmules): यह मुख्य रूप से किसी पौधे, पत्ती या तने के आगे (अग्र) वाले भाग बहुकोशिकीय हरे रंग की गोलाकार संरचनाओ का निर्माण होता है। इसमे अनुकूल समय के उपरान्त नये पौधे के रूप में बदल जाते हैं।

(5) खण्डीभवन (Fragmentiation) : इसमे जब कोई बहुकोशिकीय जनक जन्तु का शरीर दो से ज्यादा भागो मे स्वतः ही टूट जाता है और प्रत्येक खण्ड कुछ समय बाद नया पौधा जीव का निर्माण कर लेता है।

उदाहरण – स्पाइरोगाइरा शैवाल

(6) पुनरुद्‌भवन (Regeneration): जब किसी जीव को हो या से अधिक भागो में बाट दे लेकिन उसमे केन्द्र क का कुछ अंश उपस्थित हो तो वह पुनः विभाजन द्वारा पूर्ण शरीर का निर्माण कर लेता है।

उदाहरण

हाइड्रा, अमीबा, प्लेनेरिया

 

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