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National Income and Related Aggregates Class 12 In Hindi

National Income and Related Aggregates Class 12 In Hindi

Table of Contents

National Income and Related Aggregates Class 12 In Hindi

(राष्ट्रीय आय का लेखांकन)

National Income and Related Aggregates Class 12 In Hindi
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Very Short Question

Question 1 : – राष्ट्रीय आय क्या होती है?
उत्तर -किसी देश के अन्दर वहाँ रहने वाले निवासियो द्वारा अर्जित की गई कुल आय राष्ट्रीय आय कहलाती है।

Question 2 : -GDP का पूरा नाम लिखिए

GDP
GDP

उत्तर-ग्रोस डोमेस्टीक प्रोडक्ट (सकल घरेलू उत्पाद)

Question 3 -GNP क्या है?
उत्तर -यदि GDP मे विदेशी से आयी आय को जोड दे तो इसे GNP कहते हैं।

Question 4- मूल्य हास को समझाइए|
उत्तर -किसी पूजी मे आशी घिसावत के बाद उसके मूल्य कमी, मूल्य हास मे आयी कहलाती है।

Question 5-समष्टि माँग क्या होती है?
उ० – अर्थ व्यवस्था में कुल माँग को समष्टि मांग कहते है।

Question 6- समष्टि माँग के क्या हाटक है?
उत्तर –  उपयोग माँग व निवेश माँग

Question 7-उपभोग फलन का सूत्र लिखिए

उत्तर – a+by 30= C=

Question 8-MPC किसे कहते है? 

सीमान्त उपभोग प्रवृत्ति MPC 30-कहलाती है।

Question 9-MPC का सूत्र लिखिए

उत्तर –  MPC = AC/D۷

Question 10- MPC का मान कितना होता है?

उत्तर – 0 व 1 के बीच 30-

Question 11-निवेश गुणक का सूत्र लिखिए

उत्तर – K= 1/(1-MPC)

दीर्घ-प्रश्न (Long Question)

Question 1-उत्पादन के चार कारक कौन-कौन से है और इनमे से से प्रत्येक पारिश्रमिक को क्या कहते है ?

उत्तर-उत्पादन के अधोलिखित 4 कारक है।
1-श्रम -किसी भी प्रकार का शारीरिक या मानसिक कार्य जिसके द्वारा धन का अर्जन किया जा सके। श्रम कहलाता है।
उदाहरण -मजदूर के द्वारा की गई दिहाडी मजदूर के बाद धन की प्राप्ति की जाती है।
२-भूमि :अर्थशास्त्र मे प्रयोग होने वाली बह सभी प्राकृतिक साधनो को भूमि मे शामिल करते है।
3-पूँजी :-उत्पादन में प्रयोग होने वाले मनुष्य उत्पादित साधनो को भूमि में शामिल किया जाता है।
4- उद्यमी:उद्य‌मी ऐसे व्यक्ति होते है जो किसी भी निर्णयो का नियन्त्रित करने का साहस होता है। करते है। जिनके अन्दर जोख़िम वहन करने का साहस हो

नोट:-

  1.  श्रम के पारिश्रमिक को वेतन कहा जाता है।
  2.  भूमि के पारिश्रमिक को किराया कहते हैं।
  3. पूँजी के पारिश्रमिक को व्याज कहते हैं।
  4. उध्‌मी के पारिश्रमिक को लाभकहते हैं।

घरेलू आय :- घरेलू आय मे अपने देश की घरेलू सीमा के भीतर ए उत्पादित आय को शामिल किया जाता है। इसमे यह शर्त शामिल की जाती है कि आय उत्पन्न करने वाली व्यक्ति भारतीय हो या गैर भारतीय शामिल होते हैं |

Question 2-राष्ट्रीय आय की गण‌ना किन विधियों के द्वारा की जाती है?
उत्तर – राष्ट्रीय आय की निम्म लिखित 3 विधि से ज्ञात करते हैं।

  1. उत्पादन विधि (value Added method)
  2. आय विधि. (Income method)
  3. व्यय विधि (Expenditure method)

Question-4 मूल्य ह्रास से आप क्या समझते हैं? मूल्य ह्रास GDP को कैसे प्रभावित करते है

उ०-मूल्य ह्रास का अभिप्राय सम्पत्तियो की धिसावट से हैं | मूल्य ह्रास के कारण सम्पतियो के मूल्य में कमी आ जाती है। सकल (Gross) से शुद्ध (Net) घरेलू उत्पाद प्राप्त करने के लिए जीडीपी (GDP) में से मूल्य ह्रास से घटाया जाता है।

Question 5 – वास्तविक GDP और मौद्रिक जीडीपी में अंतर स्पस्ट
उत्तर – वास्तविक GDP आर्थिक विकाश का धोतक है।
वास्तविक GDP िस्ठर कीमतो पर मापी जाती है|

मौद्रिक GDP: मौद्रिक GDP चालू कीमतो पर मापी जाती है।

Question-6 अर्थशास्त्र से आप क्या समझते हैर इसके कितने भाग है ?

उत्तर-अर्थशास्त्र सामाजिक विज्ञान है, यह अध्ययन करता है कि मनुष्य सीमित संसाधनो का किस प्रकार उपयोग करता है। जिससे उसकी असीमित अधिक आवश्यकता को पूर्ण किया जा सके अर्थशास्त्र के अध्ययन से यह पता चलता है कि वस्तुओ और सेवाओ का उत्पादन, वितरण, उपभोग का के से सम्भव हो सकता हैं।
दूसरे शब्दो मे – अर्थशास्त्र मानव के जीवन से जुडी सभी गतिविधियो का अध्ययन करता है, जिससे उसका जीवन बेहतर हो । इसे अर्थशास्त्र का वैज्ञानिक अध्ययन कहते हैं।

Question 7-अर्थशास्त्र से क्या अभिप्राय हैं ? समझाइये
उत्तर-अर्थशास्त्र की अनेक परिभाषा है अनेको विद्वानो ने इसको परिभाषित किया है।

मार्शल के शब्दो मे – मार्शल ने अर्थशास्त्र की परिभाषा मे यह कहा था कि अर्थशास्त्र मानव जीवन की सामान्य गतिविधियों का अध्ययन करता है।

राबिन्स के शब्दो मे – राबिन्स के शब्दो में अर्थशास्त्र वह विज्ञान है, जो सीमित साधनो और असीमित आवश्यकताओं के बीच सम्बंध अध्ययन करता है। का

अर्थशास्त्र के प्रकार-अर्थशास्त्र को मुख्य रूप से दो भागो मे विभक्त किया गया है।

(ⅰ) सूक्ष्म अर्थशास्त्र (Micro Economics)

(ii )समष्टि अर्थशास्त्र (macro Economics)

(ⅰ) सूक्ष्म अर्थशास्त्र (Micro Economics)-इस अर्थव्यवस्था को सूक्ष्म अर्थशास्त्र भी कहते है| इसमे व्यक्तिगत इकाईयो को शामिल करते है।
उदाहरण – उपभोक्ता, उत्पादक,

(ii )समष्टि अर्थशास्त्र (macro Economics)-इसको दीर्घ अर्थव्यवस्था कहते है। इस अर्थव्यवस्था में पूरी अर्थ व्यवस्था का अध्ययन होता है।

Economics

Economics chapter 1st 

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