NIOS Class 12 Hindi Chapter 1 Notes निर्गुण भक्ति काव्य : कबीर और जायसी

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NIOS Class 12 Hindi Chapter 1 Notes निर्गुण भक्ति काव्य : कबीर और जायसी

लघु उत्तरीय प्रश्न- उत्तर

(निर्गुण भक्ति काव्य : कबीर और जायसी)

प्र०-निर्गुण भक्ति क्या है?

उत्तर –निर्गुण भक्ति:- 

                                           निर्गुण भक्ति वह होती है, जिसमे ईश्वर को निराकार, बिना रूप और बिना मूर्ति के माना जाता है। निर्गुण संतो के शब्दो मे भगवान सर्वव्यापी है, ईश्वर प्रत्येक जगह मे उपस्थित है।

निर्गुण भक्ति की विशेषताए:-

                                            निर्गुण भक्ति की निम्न विशेषताए है।

  1. ईश्वर निराकार है।
  2.  मूर्ति पूजा का विरोध
  3. जाति-पाति का विरोध
  4.  गुरु की महिमा को मानना
  5.  आडम्बर और पाखण्ड का विरोध

प्र०- कबीर दास का जीवन परिचय दीजिए

उ०-कबीर दारा का जीवन परिचय:-

                                                        कबीरदास निर्गुण भक्ति धारा के प्रमुख संत कवि थे। कबीर का जन्म 1398 ई. में माना जाता है। कबीर दास जी के गुरु रामानंद थे। कवीर दास जी ने समाज में फैली कुरीतियो और अंध विश्वास का विरोध किया था।

कबीर दास की भाषा शैली:-

                                                             कबीर दास की भाषा सधुक्कडी थी , कबीर दास ने दोहा और साखी शैली का प्रयोग किया, इनकी भाषा सरल है, इन्होने प्रभाव शाली शब्दो का प्रयोग किया है।

कबीर दास के प्रमुख विचार:-

                                                           कबीरदास के प्रमुख विचार निम्न है।

  1.  ईश्वर एक है
  2. गुरु का स्थान सर्वोपरी हैं |
  3. मानवता सबसे बड़ा धर्म है।
  4. कबीर दास ने कर्म पर जोर है।

कबीर दास जी का प्रसिद्ध दोहा

                                                         बुरा जो देखन में चला, बुरा न मिल्या कोई
जो दिल खोजा आपना, मुझसे बुरा न कोय।

अर्थ :- दूसरी की बुराई देखने से पहले अपनी बुराई देखनी चाहिए अपने अंदर झांकना चाहिए.

NIOS Class 12 Hindi Chapter 1 Notes निर्गुण भक्ति काव्य : कबीर और जायसी

प्र०-मलिक मोहम्मद जायसी का परिचय दीजिए

उत्तर -जीवन परिचय:-

                                           जायसी एक प्रसिद्ध सूफी कवि थे। मलिक मोहम्मद जायसी का जन्म उत्तर प्रदेश के जायस मे हुआ । जायसी की प्रसिद्ध रचना पद‌मावत है।

काव्य की विशेषताएँ:-

                                                प्रेम को ईश्वर तक पहुँचने का माध्यम माना है। इनकी शैली प्रतीकात्मक व इनकी भाषा भावपूर्ण है। जो इनकी शैली की विशेषता है।

 

पद‌मावत की विशेषताए:-

                                                    पदमावत् रानी पद‌मावती की प्रमुख कथा है, जिसमे प्रेम और त्याग का संदेश दिया है।

विस्तृत प्रश्न-उत्तर

 

प्र०- निर्गुण भक्ति की विशेषताएँ को समझाइए

उ०-निर्गुण भक्ति:-

                               निर्गुण भक्ति उस भक्ति धारा को कहते है | जिसमे ईश्वर को निराकार (जिसका कोई आकार नहीं होता) निर्माण और सर्वव्यापी माना जाता है। इस धारा के संतो ने ईश्वर को निर्गुण व सर्वव्यापी माना है।

निर्गुष भक्ति की विशेषताए:-

                                               निर्गुष भक्ति की विशेषताए निम्न हैं |

  1. ईश्वर का रूप निराकार हैं, संतो के अनुसार भगवान का कोई रंग, रूप, आकार नहीं होता है।
  2.  निर्माण भक्ति में मूर्ति-पूजा का विरोध किया जाता है।
  3. जाति-पाति का विरोध निर्गुण भक्ति में किया जाता है, समाज मे फैली ऊँच-नीच और भेदभाव को समाप्त करने का प्रयास किया जाता है|
  4.  निर्गुण भक्ति में गुरु की महिया पर बल दिया जाता है, क्योकि गुरु ही ज्ञान का मार्ग दिखाता है।
  5.  आडम्बर और पाखण्ड का विरोध निर्गुण भक्ति में किया जाता है।

प्र०२ – कबीर दास के जीवन और साहित्यिक विशेषताओ पर प्रकाश डॉलो

उत्तर -कबीर दास निर्णण भक्ति धारा के प्रमुख संत थे। इनका जन्म 1398 में वाराणसी में माना गया है। इनके गुरु रामांनद जी थे। इनका पालन पोषण नीरू व नीमा नाम के मुस्लिम जुलाहे परिवार ने किया था।

साहित्यक विशेषताए:- भाषा इनकी भाषा सधुक्कडी थी, जिसमे अवधी, बज व खड़ी बोली का मिला जुला असर मानी जाती हैं |

  1. शैली दोहा व साखी शैली
  2. सामाजिक सुधार कबीर दास अंधविश्वास, पाखड व कमी पानी जाति-पाति का विरोध किया।
  3. मानवता का संदेश:-कबीर दास ने सभी मनुष्यो का समान माना है, सभी लोग समान है।
  4. गुरु का महत्त्व :- कबीर दास ने ईश्वर को महान बताया है।
  5. कबीर की वाणी आज भी समाज मे सच्चाई व सदाचार का मार्ग दिखाती है।

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