भारतीय अर्थव्यवस्था का विहंगावलोकन – NIOS Class 12 Economics Notes in Hindi (Chapter 1st)

Table of Contents

भारतीय अर्थव्यवस्था का विहंगावलोकन – NIOS Class 12 Economics Notes in Hindi (Chapter 1st)

 

अति लघु उत्तरीय प्रश्न-उत्तर

प्र०1- विहंगावलोकन का क्या अर्थ है? समझाइए

उत्तर -विहंगावलोकन का अर्थ किसी विषय को व्यापक और समग्र रूप से समझाना। विहंगावलोकन कहलाता हैं |

भारतीय अर्थ व्यवस्था में इसका अर्थ का आशय

1 अर्थव्यवस्था की सरंचना
2.इसका विकाश
3 . समस्याएँ
4 .वर्तमान स्थिति
5 .सम्पूर्ण अध्ययन

भारतीय अर्थव्यवस्था का विहंगावलोकन – NIOS Class 12 Economics Notes in Hindi (Chapter 1st)

प्र०2 – स्वतन्त्रता से पहले भारतीय अर्थवस्वस्था की दो प्रमुख विशेषता क्या थी ?

उत्तर-1 .कृषि प्रधान अर्थव्यवस्था
2 .कुटीर उद्योगो का पतन

 

प्र०3 -मिश्रित अर्थव्यवस्था क्या है?

उत्तर -मिश्रित अर्थव्यवस्था अर्थशास्त्र की वह प्रणाली है, जिसमे निजी क्षेत्र व सार्वजनिक क्षेत्र को शामिल किया जाता है। भारतीय अर्थ-व्यवस्था स्वतन्त्रता के बाद मिश्रित अर्थव्यवस्था प्रणाली को अपनाया है।

 

प्र०4 -पंचवर्षीय योजना क्या है?

उत्तर – पंचवर्षीय योजना – पंचवर्षीय योजना मे पाँच वर्षों की विकाश की योजना बनाई जाती है| जिसमे सरकार आर्थिक विकाश के लक्ष्यों को निर्धारित करती है।

प्र०5- हरित क्रांति क्या है?

उत्तर -देश की आजादी के बाद देश में अनाज की समस्या सामने आने लगी। सन 1960 के दशक मे उन्नत फसल के बीज, रासायनिक उर्वरक और सिचाई तकनीक का विकाश व उपयोग किया, जिससे फसल के उत्पादन में वृद्धि होने लगी। इसी को हरित काँत्रि कहते है।

प्र० 6 – 1991 की नई आर्थिक कीति के तीन मुख्य स्तम्भ क्या थे र

उत्तर- ① उदारीकरण
② निजीकरण
③ वैश्वीकरण

 

प्र० 7 – प्राथमिक क्षेत्र में कौन-कौन सी गतिविधियों को शामिल किया जाता है?

उत्तर -① कृषि
2 .पशुपालन
3.मत्स्य पालन
4 .खनन

 

प्र० 8-सेवा क्षेत्र क्या है?

उत्तर – सेवा क्षेत्र वह क्षेत्र होता है, जिसमे लोगो को सेवाये दी जाती है।

उदाहरण-① बैकिक
②शिक्षा
③ स्वास्थ
④परिवहन
⑤ सूचना प्रौद्योगिकी

 

प्र० 8- प्रति व्यक्ति आय क्या है ?

उत्तर – प्रतिव्यक्ति आय :- किसी देश की कुल आय तथा उस देश के सभी लोगो की संख्या से भाग हेने पर जो आय की प्राप्ति है। उसे प्रतिव्यक्ति आय कहते है।

देश की कुल आय =प्रतिव्यक्ति आय / देश के सभी व्यक्ति

 

प्र० 9 -गरीबी रेखा किसे कहते हैं?

उत्तर -गरीबी रेखा:- किसी देश के वह व्यक्ति जिनकी आय न्यूनतम होती है। और वह मूलभूत आवश्यकतारे पूरी नहीं कर पाते है। इसे गरीबी रेखा कहते है।

 

लघु उत्तरीय प्रश्न

प्र०१ – स्वतन्त्रता के समय भारतीय अर्थव्यवस्था की स्थिति कैसी थी ? स्पष्ट करे।

उत्तर- जब देश आजाद हुआ तो देश की आर्थिक स्थिति अत्यन्त कमजोर थी, । स्वतन्त्रता से पहले भारत की अर्थव्यवस्था औपनिवेसिक शासन के अधीन थी । बिट्टिश सरकार ने भारत के लोगो का शोषण किया, जिससे उनकी अर्थव्यवस्था का सर्वानाश हो गया।

विशेषताएँ
① • कृषि प्रधान अर्थव्यवस्था:- भारत के सभी लोग कृषि के कार्यों में संलग्न थे। इनका उत्पादन कम होने लगा कृषि का आसित्व समाप्त हो गया

2 .भारत में उद्योगो का पतन :- हस्तशिल्प नष्ट होते जा रहे थे|

3.व्यापार असुंतलन:- भारत का सभी कच्चा माल इग्लैण्ड को निर्यात हो जाता था, जिससे व्यापार मे असतुलन उत्पन्न हो गया।

4.गरीबी व बेरोजगारी :- बेरोजगारी व गरीबी चरम पर थी। कोई भी कार्य शेष नही बचा, भारत मे भूषभरी की दशा सामने आ गयी देश गरीब हो गया।

5.बुनियादी ढाँचे की कमी :- सड़क , शिक्षा, स्वास्थ्य का पूर्ण रूप से अभाव था।

 

प्र०2 -स्वतन्त्रता के बाद भारतीय अर्थव्यवस्था के विकाश का वर्णन कीजिए

उत्तर-जब भारत को स्वतन्त्र‌ता मिली तो भारत ने कई योजनाओं को योजनाबद्ध किया जिससे कई कार्य सफल हुए | भारत ने कई कदम उठाये और उनमे सफलता प्राप्त की

① पंचवर्षीय योजनाओ को शुरु किया

(2) कृषि के विकाश में सराहनीय कार्य

(3) औधोगिकरण से उद्योगों का विकाश

(4) कई गरीबी कार्यक्रमों का शुभारंभ किया गया

 

प्र०3 – 1991 की नई आर्थिक नीति की व्याख्या कीजिए

उत्तर:- 1991 मे भारत आर्थिक मंदी से गुजर रहा था। क्योकि उस समय भारत मे आर्थिक विकाश नहीं हो रहा था। और विदेशी मुद्रा का अभाव था |

इसके लिए भारत सरकार ने कुछ उपाय किये थे।

सुधारः-① उदारीकरण- भारत सरकार ने प्रचलित लाइसेन्स प्रणाली को पूर्ण तया समाप्त कर दिया
2 निजीकरण :- सरकार ने कम्पनियो का निजी करण समाप्त कर दिया

3 ③ वैश्वीकरण:- विदेशी मुद्रा का भारत में आये इसलिए वैश्वीकरण निति को अपनाया, विदेशी निवेश आये इसके लिए कई कार्य किये गये।

दीर्घ  प्रश्न – उत्तर

प्रश्न 1: स्वतन्त्रता से पूर्व भारतीय अर्थ व्यवस्था की विशेषताओ का वर्णन कीजिए
उत्तर -प्रस्तावना:

हम जानते है कि भारत की आजादी के पूर्व भारतीय अर्थ व्यवस्था ब्रिट्रिश औपनिवेशिक शासन के अधीन थी। कुछ भी व्यवस्था भी नीति भारत के पक्ष में नही भी यह नीति केवल भारत से लाभ कमाने के लिए बनायी गयी थी | इस समय और आजादी के पहले अर्थव्यवस्था की तुलना करे तो यह असम्भव सी बात सी लगेगी। उस समय भारत की अर्थव्यवस्था अत्यन्त कमजोर थी।

1- कृषि प्रधान अर्थव्यवस्था:- आज अर्थ व्यवस्था में कृषि का बहुत बडा योगदान है। उस समय भारत की कृषि पर 70% जनसख्या निर्भर थी। उस समय कृषि पांरपरिक तकनीको पर आधारित नहीं थी। सिचाई की कमी, जमीदारी प्रथा, अच्छे बीजो का पूर्णतया अभाव, उस समय कम उत्पादन होता था।

2- भारत अग्रे‌जो का औपनिवेश:- भारत अंग्रेजो का औपनिवेश था. भारत का कच्चा माल इंग्लैण्ड भेज दिया जाता था। जिसके बाद सह मशीनो से तैयार कपडे और अन्य वस्तुए भारत में आयात होती और मंहगे दामो में बेची जाती थी| जिससे भारत के व्यापारियो तथा साधारण व्यक्ति‌यो को मंहगी वस्तुओ को खरीदने कोई भी अन्य विकल्प नहीं बचा इसका एक मात्र कारण कच्चा माल उपलब्ध नहीं होता था |

3 .व्यापार असुंतुलन :-भारत का समस्त कच्चा माल भारत से बाहर चला जाता था, जिससे भारत मे व्यापार असंतुलन की स्थिति आ गई थी।

4. गरीबी व बेरोजगारी :- भारत के सभी लोगो का गरीबी व बेरोजगारी का सामना करना पड़ रहा था, प्रति व्यक्ति के न के बराबर थी।

⑤ शिक्षा का अभाव :- भारत में धन का अभाव था, जिस कारण भारतीय जनता अनपढ़ ही रह गई, और भारत अन्धकार मे चला गया।

 

प्रश्न 2:- स्वतन्त्रता के बाद भारत ने आर्थिक विकाश के लिए कौन-2 सी रणनीतियाँ अपनाई थी?

उत्तर – भारत की आजादी के बाद यहाँ की अर्थव्यवस्था नगण्य थी। उसके बाद भारत ने योजनाबद्ध विकाश किया का मार्ग अपनाया इसके कुछ अधोलिखित बिंदु थे।

(1 ) मिश्रित अर्थव्यवस्था को अपनाय गया:- भारत सरकार ने मिश्रित अर्थव्यवस्था को पूर्ण रूप से अपनाया, इसमे सरकार और निजी क्षेत्र दोनों को एक समान महत्त्व प्रदान किया।

२. पंचवर्षीय योजनाओ को शुरू किया:- सरकार ने 1951 भारत में पंचवर्षीय योजना का शुभारम्भ किया सचाई

① प्रथम योजना

(2) द्वितीय योजना

③ तृतीय योजना

① प्रथम योजना- प्रथम योजना के कृषि पर जोर दिया गया था, जिसमे कृषि के पिछडेपन को दूर करने का भरसक प्रयास किये उन्नत फसल, कीटनाशी को बनने और विदेशी आयात होने बाले खाधान्न को कम करने की कोसिस की गई।

② द्वितीय योजना: द्वितीय योजना के अंतरगत औधोगिकरण पर जोर दिया गया, जिससे हम अन्य देशो पर निर्भर न रहे।

3 .तृतीय योजना : तृतीय योजना के अन्दर भारत के लोगो को आत्म निर्भर बनाना था |

4. हरित क्रांति :- हरित क्रांति का विकाश भारत में नहीं होता तो देश का विकाश सम्भव नही था। हरित क्रांति होने के बाद देश मे आयतित फसल (खाद्यान्न) बंद हो गया, परन्तु अभी तक ये पूर्ण रूप से बद नहीं हो सका

⑤गरीबी उन्मूलन कार्यक्रम – भारत के गरीबी का उन्मूलन किया गया

 

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