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NIOS Class 12 जीव विज्ञान क्या है? (Biology in Hindi) | परिभाषा, शाखाएं, वर्गीकरण, नामकरण, कोशिका – Full Notes

Table of Contents

NIOS Class 12 जीव विज्ञान क्या है? (Biology in Hindi) | परिभाषा, शाखाएं, वर्गीकरण, नामकरण, कोशिका – Full Notes

जीव विज्ञान

अगर आप जीव विज्ञान (Biology) को आसान भाषा में समझना चाहते हैं, तो यह पोस्ट आपके लिए सबसे बेहतरीन है। यहां आपको परिभाषा, शाखाएं, वर्गीकरण, कोशिका, नामकरण, टैक्सोनॉमी आदि का पूरा और विस्तृत नोट्स मिलेगा जो NIOS, बोर्ड और प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए बहुत उपयोगी है।

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जीव विज्ञान क्या है?

जीव विज्ञान-विज्ञान की वह शाखा जिसमें जीवित जीवों का अध्ययन किया जाता है,उसे जीव विज्ञान कहते हैं|
जीव विज्ञान को दो भागों में विभाजित कर सकते हैं|
Bio = Living(जीवित )
Logy= Study(अध्ययन)

दूसरे शब्दों में जीव विज्ञान के अंतर्गत जीवित जीवन का अध्ययन किया जाता है|

What is Biology?

जीव विज्ञान की शाखाएं –

जीव विज्ञान के जनक अरस्तु थे, जिन्होंने सबसे पहले वैज्ञानिक रूप से इसका अध्ययन किया था| जीव विज्ञान की मुख्य रूप से दो शाखाएं हैं|

1.जंतु विज्ञान(Zoology)
2.पादप विज्ञान(Botany)

1.जंतु विज्ञान(Zoology) :- जंतु विज्ञान के अंतर्गत जंतुओं के जीवन उनकी शैली का अध्ययन किया जाता है इसके जनक अरस्तु थे|

2.पादप विज्ञान(Botany):-पादप विज्ञान मेंवनस्पतियों तथा पादपो का अध्ययन करते हैंइसके जनक Theophrastus थे |

सजीवों के लक्षण:-सजीवों के अधोलिखित लक्षण है|

1.वृद्धि- कोशिकाओं की संख्या तथा द्रव्यमान में होने वाली निश्चित वृद्धि, वृद्धि कहलाती है|
दूसरे शब्दों में वृद्धि हमेशा बढ़ते हुए क्रम में होती है|

2.जनन-जब कोई कोशिका या जीव अपने ही जीवो जैसे अन्य किसी कोशिका या जीव को उत्पन्न करता है तो इसे जनन कहते हैं|

3.संवेदनशीलता-जीवन में वातावरण के अनुसार खुद को ढालने की क्षमता होती है इसी को संवेदनशीलता कहते हैं|

4.उपापचय-इसके द्वारा शरीर के सभी जैविक और रासायनिक क्रियाएं संपन्न होती हैं|

5.स्वत प्रतिलिपि कारण-अलैंगिक जनन द्वारा अपने कार्बन कॉपी तैयार करना स्वत प्रतिलिपि कारण कहलाता है इसे क्लोन भी कहते हैं|

विविधता:-कोशिका के आधार पर जीवों का वर्गीकरण मुख्य रूप से तीन भागों में किया जा सकता है|
1. अकोशिकीय
2.एक कोशिकीय
3.बहुकोशिकीय

1. अकोशिकीय:-इसमें कोई कोशिका नहीं होती,केवल DNA और RNA उपस्थित होते हैं|
उदाहरण- विष्णु

2.एक कोशिकीय-इसमें कोशिकाएं उपस्थित होते हैं ,DNA तथा RNA उपस्थित होता है| उदाहरण अमीबा ,पैरामीशियम, यूग्लीना ,इत्यादि

3.बहुकोशिकीय-इसमें कोशिकाएं उपस्थित होते हैं|
उदाहरण- मानव

जीवो का नामकरण

जीवों का नामकरण (Nomenclature) जीवों को विश्व स्तर पर एक ही नाम से पहचानने की प्रणाली।

ICZN International Code of Zoological Nomenclature

जंतुओं का नामकरण

उदाः मनुष्य → होमोसेपियंस (Homo sapiens)

ICBN:-International Code of Botanical Nomenclature

वनस्पतियों / पौधों का नामकरण

उदाः आम → मैंगीफेरा इंडिका (Mangifera indica)

  1. → जीव विज्ञान के आधार (Fundamentals of Biology):
  2. → जीव विज्ञान (Biology) के जनकः अरस्तु (Aristotle)
  3. → जूलॉजी (Zoology) के जनकः अरस्तु
  4. → बॉटनी (Botany) के जनकः थियोफ्रेस्टस (Theophrastus)
  5. → जैव विविधता (Biodiversity):
  6. → पृथ्वी पर ज्ञात जीवों की कुल प्रजातियों की संख्या लगभग 1.7 से 1.8 मिलियन है। जिनमें जंतुओं की प्रजातियां सबसे अधिक हैं।

नामकरण (Nomenclature) की आवश्यकता और संस्थाए , वैज्ञानिक नाम की आवश्यकता क्यों?

अलग-अलग भाषाओं और क्षेत्रों में जीवों के अलग-अलग नाम होते हैं। (जैसेः आम, Mango, आम्र)।

भ्रम से बचने के लिए एक ऐसे सार्वभौमिक (Universal) वैज्ञानिक नाम की आवश्यकता है जिससे जीव पूरे विश्व में पहचाना जा सके।

नामकरण करने वाली मुख्य अंतर्राष्ट्रीय संस्थाएं : <

1. ICZN – International Code of Zoological Nomenclature (जंतुओं के नामकरण के लिए)

2. ICBN International Code of Botanical Nomenclature (पौधों के नामकरण के लिए)
भ्रम से बचने के लिए एक ऐसे सार्वभौमिक (Universal) वैज्ञानिक नाम की आवश्यकता है जिससे जीव पूरे विश्व में पहचाना जा सके।

नामकरण करने वाली मुख्य अंतर्राष्ट्रीय संस्थाएं :

1. ICZN – International Code of Zoological Nomenclature (जंतुओं के नामकरण के लिए)

2. ICBN – International Code of Botanical Nomenclature (पौधों के नामकरण के लिए)

द्विनाम पद्धति के नियम (Rules of Binomial Nomenclature)

जनकः कैरोलस लीनियस (Carolus Linnaeus) इन्हें नामकरण का पिता (Father of Nomenclature) कहा जाता है।

मुख्य नियमः

1. एक जीव का केवल एक ही वैज्ञानिक नाम होता है।

2. कोई भी एक नाम दो अलग-अलग जीवों का नहीं हो सकता।

3. भाषाः सभी वैज्ञानिक नाम लैटिन भाषा (Latin) में लिखे जाते हैं। (यह एक मृत भाषा (Dead Language) है, इसलिए इसमें कोई बदलाव नहीं होता)।

4. वैज्ञानिक नाम के हमेशा दो भाग होते हैं:

पहला शब्दः वंश (Genus) को दर्शाता है।

दूसरा शब्दः जाति / प्रजाति (Species) को दर्शाता है।

5. अक्षर का नियमः

वंश (Genus) का पहला अक्षर Capital letter में होता है।

जाति (Species) का पहला अक्षर Small letter में होता है।

6. छपाई (Printing) में वैज्ञानिक नाम को तिरछा (Italics / Cursive) लिखा जाता है।

7. हाथ से लिखते समय (Handwritten): वंश और जाति दोनों शब्दों को अलग-अलग Underline (रेखांकित) किया जाता है।

8. नाम के अंत में इसके जनक (खोजकर्ता) का नाम संक्षिप्त में लिखा जाता है (जैसे: Linn.) ।

महत्वपूर्ण उदाहरण (Examples):

आम (Mango): Mangifera indica Linn.

मानव (Human): Homo sapiens
जीवों का कोशिकीय वर्गीकरण (Cellular Classification)

कोशिका के आधार पर पर जीवों का वर्गीकरण

अकोशिकीय (Acellular)

कोशिका पूरी तरह अनुपस्थित। केवल DNA/RNA और प्रोटीन खोल।

उदाहरणः विषाणु (Virus)

एक कोशिकीय (Unicellular)

प्रोकैरियोटिक (Prokaryotic)

उदाहरणः जीवाणु (Bacteria)

यूकैरियोटिक (Eukaryotic)

अकोशिकीय जीवः विषाणु (Acellular Organisms: Virus)

मुख्य विशेषताएं (Key Features):

विषाणुओं में कोई कोशिका नहीं पाई जाती है (Acellular)।

इनमें कोई भी कोशिकांग (जैसे माइटोकॉन्ड्रिया, गॉल्जी बॉडी आदि) उपस्थित नहीं होते हैं।

ये केवल आनुवांशिक पदार्थ (DNA या RNA) और उसके चारों ओर मौजूद प्रोटीन के खोल (Protein Coat) से बने होते हैं।

अध्ययन के लिए उदाहरणः HIV विषाणु

पूरा नाम: Human Immunodeficiency Virus

आनुवांशिक पदार्थः RNA (संख्या में 2 होते हैं)।

बाहरी आवरण में वसा (Lipid) और प्रोटीन होते हैं, जिसे सम्मिलित रूप से लाइपोप्रोटीन (Lipoprotein) कहते हैं।

HIV विषाणु की संरचना (Structure of HIV)

नॉब (Knob): संक्रमण के लिए शरीर से जुड़ने में सहायक।

बाई लिपिड लेयर (Bi-lipid Layer): सबसे बाहरी वसा के दो आवरण।

कैप्सिड (Capsid) / खोलः प्रोटीन का बना मध्य आवरण।

सेंन्ट्रल कोर (Central Core): सबसे अंदरूनी (मध्य) भाग।

RNA (संख्या 2): मुख्य आनुवांशिक पदार्थ (जीनोम)।

एंजाइमः प्रोटिएज (Protease) और इंटीग्रेज (Integrase) के कण।

कैरियोलॉजी और कोशिका के प्रकार (Etymology of Cells)

शब्दावली विखंडन (Term Breakdown):

Karyon = Nucleus (केंद्रक)

Logy Study (अध्ययन)

कैरियोलॉजी (Karyology): विज्ञान की वह शाखा जिसमें केंद्रक का अध्ययन किया जाता है।

केंद्रक की उपस्थिति के आधार पर एक कोशिकीय जीवः

1. प्रोकैरियोटिक (Prokaryotic):

Pro = Primitive / Old (पुराना/प्राचीन)

Karyon = Nucleus (केंद्रक)

अर्थः ऐसी कोशिका जिसमें सत्य केंद्रक अनुपस्थित होता है। (उदाहरणः जीवाणु)।

2. यूकैरियोटिक (Eukaryotic):

Eu = True (सत्य / स्पष्ट) Karyon = Nucleus (केंद्रक)

> अर्थः ऐसी कोशिका जिसमें स्पष्ट केंद्रक पाया जाता है।

प्रोकैरियोटिक कोशिकाः जीवाणु (Bacteria)

जीवाणु की मुख्य आंतरिक विशेषताएं:

यह एक प्रोकैरियोटिक जीव है, इसलिए इसमें सत्य केंद्रक (True Nucleus) नहीं पाया जाता है।

केंद्रक के स्थान पर इसमें न्यूक्लियाइड (Nucleoid) नामक आनुवांशिक पदार्थ (DNA) होता है।

मुख्य DNA के अलावा एक अतिरिक्त वृत्तीय DNA (Circular DNA) पाया जाता है जिसे प्लाज्मिड (Plasmid) कहते हैं।

शरीर में प्रोटीन निर्माण के लिए राइबोसोम (Ribosome) उपस्थित होते हैं, जिन्हें ‘प्रोटीन की फैक्ट्री’ कहा जाता है।

ऊर्जा और श्वसन (Respiration) के लिए इसमें मीसोसोम (Mesosome) पाए जाते हैं।
कैरियोलॉजी और कोशिका के प्रकार (Etymology of Cells)

शब्दावली विखंडन (Term Breakdown):

Karyon = Nucleus (केंद्रक)

Logy Study (अध्ययन)

कैरियोलॉजी (Karyology): विज्ञान की वह शाखा जिसमें केंद्रक का अध्ययन किया जाता है।

केंद्रक की उपस्थिति के आधार पर एक कोशिकीय जीवः

1. प्रोकैरियोटिक (Prokaryotic):

Pro = Primitive / Old (पुराना/प्राचीन)

Karyon = Nucleus (केंद्रक)

अर्थः ऐसी कोशिका जिसमें सत्य केंद्रक अनुपस्थित होता है। (उदाहरणः जीवाणु)।

2. यूकैरियोटिक (Eukaryotic):

Eu = True (सत्य / स्पष्ट) Karyon = Nucleus (केंद्रक)

> अर्थः ऐसी कोशिका जिसमें स्पष्ट केंद्रक पाया जाता है।

प्रोकैरियोटिक कोशिकाः जीवाणु (Bacteria)

जीवाणु की मुख्य आंतरिक विशेषताएं:

यह एक प्रोकैरियोटिक जीव है, इसलिए इसमें सत्य केंद्रक (True Nucleus) नहीं पाया जाता है।

केंद्रक के स्थान पर इसमें न्यूक्लियाइड (Nucleoid) नामक आनुवांशिक पदार्थ (DNA) होता है।

मुख्य DNA के अलावा एक अतिरिक्त वृत्तीय DNA (Circular DNA) पाया जाता है जिसे प्लाज्मिड (Plasmid) कहते हैं।

शरीर में प्रोटीन निर्माण के लिए राइबोसोम (Ribosome) उपस्थित होते हैं, जिन्हें ‘प्रोटीन की फैक्ट्री’ कहा जाता है।

ऊर्जा और श्वसन (Respiration) के लिए इसमें मीसोसोम (Mesosome) पाए जाते हैं।
वर्गीकरण (Classification)

वर्गीकरण क्या है?

जीवों को उनके लक्षणों, स्वभाव, रहन-सहन, बाह्य संरचना आदि के आधार पर अलग-अलग श्रेणियों में विभाजित करना वर्गीकरण कहलाता है।

वर्गीकरण की आवश्यकता क्यों?

इसका मुख्य उद्ददेश्य जीवों का अध्ययन आसानी से करना है।

वर्गीकरण के जनक (Father of Classification):-

कैरोलस लीनियस (Carolus Linnaeus) को वर्गीकरण का जनक या पिता कहा जाता है। इन्होंने ही वर्गीकरण की नींव रखी थी।

वर्गीकरण की प्रणालियाँ

द्वि-जगत वर्गीकरण (Two Kingdom)

पांच-जगत वर्गीकरण (Five Kingdom)

किसके द्वाराः कैरोलस लीनियस

किसके द्वारा: आर. एच. व्हिटेकर (R.H. Whittaker)

आधारः पूरे जीव जगत को केवल दो भागों में बांटा गया।

आधारः विरोधाभास के बाद जीवों को ५ भागों में बांटा गया।

1. पौधे (Plant)

1. मोनेरा (Monera)

२. जंतु (Animal)

२. प्रोटिस्टा (Protista)

३. कवक (Fungi)

४. प्लांटी (Plantae – पौधे)

५. एनिमेलिया (Animalia – जंतु)

टेक्सोनॉमी (Taxonomy)

टेक्सा (Taxa) क्या है?

वर्गीकरण (Classification) के लिए जीव विज्ञान में एक वैज्ञानिक शब्द का प्रयोग किया जाता है, जिसे ‘टेक्सा’ कहते हैं। इसी शब्द से टेक्सोनॉमी बना है।

टेक्सोनॉमी की परिभाषाः सजीवों को उनके लक्षणों के आधार पर

अलग-अलग श्रेणियों में विभाजित करने की क्रिया को ही टेक्सोनॉमी कहा जाता है। उदाहरणः चार पैर वाले जानवर (कुत्ता, बिल्ली, हाथी) सभी अलग-अलग लक्षणों के कारण अलग श्रेणियों में रखे जाते हैं।

लक्षण + अध्ययन का उद्देश्य = टेक्सोनॉमी (श्रेणीकरण)
वर्गीकरण का पदानुक्रम (Taxonomic Hierarchy)

टॉपर ट्रिकः K-PCO FGS

K→ किंगडम (Kingdom) – जगत ↓

P → फाइलम (Phylum) – संघ

↓ C→ क्लास (Class) – वर्ग

↓ → ऑर्डर (Order) – गण

F→ फैमिली (Family) – कुल

↓ G → जीनस (Genus) – वंश

↓ S → स्पीशीज (Species) – प्रजाति

पदानुक्रम का अर्थ (Understanding the Hierarchy)

यह सभी श्रेणियां एक दूसरे का समूह (Group) होती हैं। नीचे से ऊपर की ओर :

}• अंत में यह सब मिलकर = किंगडम (जगत) बनाते हैं।

} • बहुत सारे क्लास का समूह = फाइलम (संघ) कहलाता है।

} • बहुत सारे ऑर्डर का समूह = क्लास (वर्ग) कहलाता है।

} • बहुत सारी फैमिली का समूह = ऑर्डर (गण) कहलाता है।

}• बहुत सारे जीनस का समूह = फैमिली (कुल) कहलाता है।

} • बहुत सारी स्पीशीज का समूह = जीनस (वंश) कहलाता है।

स्पीशीज सबसे छोटी इकाई है।

(नोटः हम जंतु हैं, इसलिए हमारा किंगडम एनिमेलिया (Animalia) है)

प्रजाति (Species)

प्रजाति किसे कहते हैं?

जब किसी एक जीव तथा उसके समान लक्षणों वाले जीवों के समूहों की बात की जाए, तो उसे स्पीशीज या प्रजाति कहते हैं। (जैसे मनुष्य के समूह में केवल मनुष्य होंगे, गाय-भैंस नहीं)।

उदाहरण (मनुष्य का जंतु वैज्ञानिक नाम):

Homo sapiens

नामकरण के नियम (याद रखने योग्य):

१. ‘Homo’ (होमो) = वंश (Genus) को दर्शाता है।

२. ‘sapiens’ (सेपियंस) = प्रजाति (Species) को दर्शाता है।

३. प्रजाति का नाम हमेशा छोटे अक्षर (Small letter) से शुरू होता है।

४. इसे लैटिन भाषा में लिखा जाता है और लिखते समय अंडरलाइन किया जाता है।
स्पीशीज के अध्ययन के आधार (Basis of Study)

प्रजातियों का अध्ययन करते समय मुख्य रूप से दो बातों का विशेष ध्यान रखा जाता है:

१. मॉर्फालॉजी (Morphology)

Morpho = बाह्य (External)

Logy = अध्ययन (Study)

विज्ञान की वह शाखा जिसमें जीव की बाह्य संरचना का अध्ययन किया जाता है।

* (जैसे: दो पैर, दो आंखें, बाहरी रूप-रंग जो सभी मनुष्यों में समान है) *

२. एनाटॉमी (Anatomy)

इसके अंतर्गत किसी जीव की आंतरिक संरचना का अध्ययन किया जाता है।

यह अध्ययन काट-पीट कर (Dissection) किया जाता है।

* (जैसे: शरीर के अंदर के अंगों की बनावट जो मनुष्यों में एक जैसी होती है) *

निष्कर्षः जीवों को समान श्रेणी में रखने के लिए उनकी मॉर्फालॉजी और एनाटॉमी दोनों समान होनी चाहिए।

जीव विज्ञान (Biology) का परिचय (Recap)

विज्ञान की वह शाखा जहाँ जीवित वस्तुओं का अध्ययन होता है।

जीव विज्ञान (Biology)

जनकः अरस्तु (Aristotle)

1. Botany (वनस्पति विज्ञान)

जनकः थियोफ्रेस्टस (Theophrastus)

2. Zoology (जंतु विज्ञान)

जनकः अरस्तु (Aristotle)

सजीवों के प्रमुख लक्षण

वृद्धि

जनन (अपवादः खच्चर जनन नहीं करता)

संवेदनशीलता

उपापचय

विविधता

जीवों के प्रकार (कोशिका के आधार पर)

अकोशकीय :

वायरस (केवल प्रोटीन

खोल + DNA/RNA).

एक कोशिकीय :

जीवाणु (प्रोकैरियोटिक).

– राइबोसोम

फ्लजिला (गमन)

प्लाज्मिड

बहुकोशिकीय :

मनुष्य (यूकैरियोटिक).
नामकरण एवं वर्गीकरण प्रणालियाँ

नामकरण (Nomenclature)

ICZN:

International Code of Zoological Nomenclature (जंतुओं के लिए)

ICBN

International Code of Botanical Nomenclature (पौधों के लिए)

वर्गीकरण की प्रणालियाँ

2-Kingdom Classification

→ कैरोलस लीनियस (पौधे और जंतु). (वर्गीकरण के जनक)

5-Kingdom Classification

→ आर. एच. विटेकर (मोनेरा, प्रोटिस्टा, फंजाई, प्लांटी, एनिमालिया).

टेक्सोनॉमी (Taxonomy) और वर्गीकरण

सजीवों को उनके लक्षणों के आधार पर अलग-अलग श्रेणियों में विभाजित करना।

वैज्ञानिक शब्द : टेक्सा (Taxa).

अध्ययन को सरल बनाने के लिए (जैसे घर के बिखरे सामान को व्यवस्थित करना)।

वर्गीकरण की श्रेणियां (Taxonomic Hierarchy)

K (Kingdom – जगत)

P (Phylum – संघ)

☆ट्रिक: K+PCOFGS

C (Class – वर्ग) 0 (Order – गण) F (Family – कुल) G (Genus – वंश) S (Species – प्रजाति)

1. प्रजाति (Species)

वर्गीकरण की सबसे छोटी इकाई। जब किसी एक जीव तथा उसके समान लक्षणों वाले अनेक जीवों की बात की जाए।

अध्ययन के आधार (Basis of Study)

Morphology

बाह्य संरचना का अध्ययन (External – उदाः बाल, चेहरा)।

Anatomy

आंतरिक संरचना का अध्ययन (Internal उदाः Heart, Kidney) ।

उदाः मनुष्य का वैज्ञानिक नाम होमो सेपियंस (Homo sapiens).

सेपियंस (Sapiens) प्रजाति है।

2. वंश (Genus)

यह बहुत सारी प्रजातियों या समान लक्षणों वाले जीवों का समूह होता है।

ध्यान देंः प्रजातियां (दिखने में) अलग-अलग हो सकती हैं, लेकिन उनका वंश समान हो सकता है।

आलू (Potato)

Solanum tuberosum

वंश = Solanum (सोलेनम)

बैंगन / टमाटर (Tomato)

प्रजातियां अलग

3. कुल (Family)

समान लक्षणों वाले जीनस (वंश) का समूह कुल कहलाता है।

कुलः Solanaceae (सोलेनेसी)

कुलः Panthera (पैंथेरा)

शामिल पौधेः आलू, पिटूनिया (सजावटी पौधा), धतूरा।

शामिल जंतुः चीता, तेंदुआ (Leopard), बाघ (Tiger)।

धतूरा (Datura)

4. गण (Order)
5. वर्ग (Class)

लगभग समान लक्षणों वाले गण (Order) के समूह को वर्ग कहते हैं।

वर्ग: Mammalia (मैमेलिया – स्तनधारी)

स्तन ग्रंथियां (Mammary Glands) वाले जीव

+

Carnivora (मांसाहारी गण)

बाघ, बिल्ली, कुत्ता (सभी Mammalia वर्ग में आते हैं)।

नोटः ये सभी जीव स्तनधारी हैं क्योंकि ये अपने बच्चों को दूध पिलाते हैं।

6. संघ (Phylum)

यह जीवों की एक उच्च श्रेणी है। इसमें उपस्थित जीव पूरी तरह से एक दूसरे से भिन्न होते हैं।

Amphibia (उभयचर) – जल और | स्थल दोनों पर (उदाः मेंढक).

Reptilia (सरीसृप) – रेंगने वाले जीव (मगरमच्छ, साँप).

Aves (पक्षी वर्ग) – उड़ने वाले जीव.

Mammalia (स्तनधारी) – दूध पिलाने वाले जीव.

7. जगत (Kingdom)

यह वर्गीकरण की सबसे उच्च श्रेणी है। पृथ्वी पर पाए जाने वाले सभी जीवों को इसमें वर्गीकृत किया जाता है।

1. मोनेरा (Monera)

5. एनिमालिया (Animalia – जंतु)

जगत (Kingdom)

2. प्रोटिस्टा (Protista)

4. प्लांटी (Plantae – पौधे)

3. फंजाई (Fungi – कवक)

वर्गीकरण का मास्टर चार्ट (Quick Revision)

Kingdom (जगत) → सबसे उच्च श्रेणी

Phylum (संघ) → वर्गों का समूह

Class (वर्ग) → गण का समूह

Order (गण) → कुल का समूह

Family (कुल) → वंशों का समूह

Genus (वंश) → प्रजातियों का समूह

Species (प्रजाति) → सबसे छोटी इकाई

★ Note: ऊपर जाने पर जीवों के बीच समानताएं कम होती जाती हैं।

परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण बिंदु (VVI)

-वर्गीकरण के जनकः कैरोलस लीनियस ।

-वर्गीकरण का मुख्य उद्देश्यः जीवों के अध्ययन को सरल बनाना।

-सबसे छोटी इकाई प्रजाति और सबसे बड़ी इकाई जगत है।

-टेक्सा (Taxa): वर्गीकरण के अध्ययन के लिए प्रयोग किया जाने वाला
वैज्ञानिक शब्द

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