NIOS कक्षा 12 हिंदी (301) के पाठ-2 में संत रैदास
(रैदास)संत रविदास मध्यकालीन भारत के महान संत थे,वे समाज सुधारक के साथ-साथ एक कवि भी थे संत रैदास प्रमुख संतों में से एक माने जाते हैं| उन्होंने अपने पदों और भजनों के माध्यम से समाज में प्रेम और भक्ति का संदेश दिया था| उनकी वाणी सरल और लोक भाषा में थी, इसलिए सामान्य लोग भी उनके विचारों को आसानी से समझ सकते थे|
जन्म और जीवन-
इनका जन्म 15वीं शताब्दी में हुआ था |इनका जन्म कुछ विद्वान उत्तर प्रदेश के वाराणसी में मानते हैं |यह जाति से चमार थे इनका व्यवसाय मोची का था
इनकी माता का नाम कर्स देवी पिता संतोष दास ,संत रविदास का जीवन बहुत साधारण था लेकिन उनके विचार अत्यंत ऊंचे थे वे जूते बनाने का काम बहुत अच्छी तरह से जानते थे पर साथ ही साथ समाज सुधार का भी संदेश दिया करते थे| संत रविदास एक ऐसे संत कवि थे जिन्होंने अपने जीवन और काव्य के माध्यम से मानवता सामान्य भक्ति,प्रेमऔर | उनकी वाणी में गहरी आध्यात्मिकता के साथ-साथ सामाजिक जागरूकता भी दिखाई देती है| वह यह मानते थे कि भगवान तक पहुंचाने के लिए किसी विशेषजाति,वर्ग या भरी आडंबर की आवश्यकता नहीं होती,बल्कि सच्चे मन से की गई भक्ति ही सबसे बड़ा मार्गहै|
NIOS कक्षा 12 हिंदी (301) के पाठ-2 में संत रैदास
रविदास में उनके कुछ पदों के माध्यम से उनकी विचारधारा ना और जीवन दृष्टि को समझने का अवसर मिलता है यह पार्टनर केवल धार्मिक भावना को प्रकट करता है बल्कि समाज में सुधार का संदेश भी देता है|
कहां जाता है कि वह संत कबीर के समकालीन थे और दोनों संतों की विचारधाराओं में कोई असमानता नहीं थी संत रविदास की शिष्य के रूप में मीराबाई का नाम प्रसिद्ध है| मीराबाई संत रविदास को अपना गुरु मानती थी|
(संत रैदास ) संत रविदास का व्यक्तित्व- संत रविदास का व्यक्तित्व अत्यंत विनम्र शांत औरआध्यात्मिकता| वे किसी के प्रति घृणा या द्वेष नहीं रखते थे | उनके व्यक्तित्व की कुछ विशेषताएं नीचे दी गई है|
- इनका जीवन अत्यंत सरल और सादगी से परिपूर्ण था|
- यह ईश्वर की भक्ति पर विश्वास रखते थे|
- वह सभी मनुष्य को समान मानते थे|
- समाज मेंजितनी भी बुराइयां थी यह खुलकर के उनका विरोध करते थे |
इनका व्यक्तित्व साधारण थायह सदैव कहते थे की महान बनने के लिए किसी विशेष पद या धन की आवश्यकता नहीं होती,बल्कि महान विचार ही व्यक्ति को महान बनाते हैं|
भक्ति आंदोलन में संत रविदास का स्थान
संत भक्ति आंदोलन में महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं | इस आंदोलन का उद्देश्य था कि लोग ईश्वरके साथ संबंध बना सके और धर्म के नाम पर फैलाए गए अंधविश्वास और आडंबर से दूर रहे| भक्ति आंदोलन दो प्रमुख धाराओं में विभाजित था|
1.सगुण भक्ति धारा
2.निर्गुण भक्ति धारा
संत रविदास निर्गुण भक्ति धारा के प्रमुख संत माने जाते हैं| निर्गुण भक्ति का अर्थ भगवान को निराकार और सर्वव्यापी माना जाता है| इस विचार के अनुसार भगवान किसी विशेष मूर्ति या स्थान में नहीं उपस्थित होते बल्कि वह प्रत्येक स्थान पर उपस्थित होते हैं|
संत रविदास की वाणी में यह विचार स्पष्ट रूप से दिखाई देता है कि ईश्वर हर व्यक्ति के भीतर निवास करते हैं|
संत रविदास की काव्य भाषा- संत रविदास की भाषा अत्यंत सरल और सहज है उन्होंने ऐसी भाषा का प्रयोग किया है जो सामान्य मनुष्य की समझ में भी आसानी से आ जाए उनकी भाषा के प्रमुख विशेषताएं निम्नलिखित है|
- लोक भाषा का प्रयोग
- सरल और स्पष्टशब्द
- भावपूर्ण अभिव्यक्ति
- आध्यात्मिकगहराई
उनकी भाषा में अवधि और खड़ी बोली का मिश्रण दिखाई देता है| यह करने की उनकी वाणी जन सामान्य के बीच बहुत अधिक लोकप्रिय हुई थी |
संत रविदास की काव्य विशेषताएं- संत रविदास के पदों में कई महत्वपूर्ण विशेषताएं देखने को मिलती हैं|
- उनकी समस्त रचनाओं में ईश्वर के प्रति गहरा प्रेम और समर्पण का भाव दिखता है |
- इन्होंने जाति-पाति के भेदभाव का पुरजोर विरोध किया था|
- उनकी वाणी सामाजिक जागरूकता के लिए तत्पर रहीथी|
- इनकी भाषा सरल और प्रभावशाली थी |
- इनकी भाषा में अध्यात्म गहराई झलकती है उनके समस्त पदों में आध्यात्मिक अनुभूति काप्रभाव दिखता है |
अति लघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न – संत रविदास कौन थे?
उत्तर-संत रविदास मध्यकालीन भारत के प्रसिद्ध संत,कविऔर| उन्होंने भक्ति समानता और मानवता का संदेश दिया है|
प्रश्न-संत रविदास का जन्म कहां हुआ था?
उत्तर-संत रविदास का जन्म उत्तर प्रदेश के वाराणसी जिले में हुआ था|
प्रश्न- संत रविदास कि भक्ति धारा के संत माने जाते हैं?
उत्तर- संत रविदास निर्गुण भक्ति धारा के संत माने जाते हैं |
प्रश्न -संत रविदास का मुख्य संदेश क्याथा?
उत्तर-संत रविदास का मुख्य संदेश था कि सभी मनुष्य समान है | और सच्चे मन से की गई भक्ति ही ईश्वर तक पहुंचती है और यही उसके पहुंचने का मार्ग प्रशस्त करती है|
प्रश्न -संत रविदास की भाषा कैसी है?
उत्तर-संत रविदास की भाषा अत्यंत सरल है सहज और लोग भाषा है उनकी भाषा जन मानस के दिमाग में आसानी पूर्वक समा जाती है|
लघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न-संत रविदास के व्यक्तित्व की मुख्य विशेषताएं लिखिए
उत्तर-संत रविदास काव्यक्तित्व अत्यंत सरल और महानथा| वे सादगी पूर्ण जीवन व्यतीत करते और ईश्वर की सच्ची भक्ति करतेथे| वह सभी मनुष्य को समान मानते थे और समाज में पहले जानी-पड़ी का विरोध करते थे| उनके भीतर मानवता के प्रति गहरा प्रेम था|
प्रश्न -संत रैदास ने समाज को क्या संदेश दिया था?
उत्तर-संत रैदास ने समाज कोसामान्य,प्रेम और भाईचारे का संदेश दिया था| उन्होंने कहा कि सभी मनुष्य एक ही परमात्मा कीसंतान है,इसलिए किसी भी प्रकार का भेदभाव नहीं होना चाहिए| उन्होंने लोगों को सच्चे मन से भक्ति करने और अच्छे कर्म करने की प्रेरणा दी है|
प्रश्न-संत रविदास की भक्ति भावना कैसी थी ?
उत्तर-संत रविदास की भक्ति भावना अत्यंत गहरी और सच्ची थी वे भगवान को निराकार मानते थे| वह मानते थे कि भगवान हर जगह उपस्थित है उनके निस्वार्थ भगवान तक पहुंचाने के मार्ग सच्ची और पवित्र भक्ति है|
प्रश्न संत रविदास की भाषा शैली की प्रमुख विशेषताएं समझाइए|
उत्तर-संत रविदास की भाषासरल,सहज और लोक भाषा पर आधारित थी| उन्होंने ऐसी भाषा का प्रयोग किया जो आसानी से आम लोगों की समझ मेंआ सके| उनकी भाषा में भावात्मक गहराई और आध्यात्मिकता प्रदर्शित होती है|
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न-संत रविदास के जीवन और विचारों का वर्णन कीजिए?
उत्तरसंत रविदास मध्यकालीन भारतके महान| उन्होंनेजो भी कार्य किए जनमानस के लिए किया|
इनका जन्म उत्तर प्रदेश के वाराणसी जिले में हुआ था वह जाट से चमार थे और जूते बनाने का काम किया करते थे|
उन्होंने जाति भेदभाव उच्च नीच की भावना का विरोध किया उनके अनुसार सभी मनुष्य समान है और भगवान की दृष्टि से कोई छोटा और कोई बड़ा नहीं है |
संत रविदास के विचार आज भी समाज के लिए प्रेरणादायक है और हमें मानवता तथा प्रेम का मार्ग दिखाते हैं उनकी प्रेरणा से ही समझ में फैली बहुत सारी कुरीतियां का अंत संभव हुआ है |
प्रश्न-संत रविदास के पदों की विशेषताएं लिखिए
उत्तर-संत रविदास के पदों में कई महत्वपूर्ण विशेषताएं देखने को मिलती हैं| यदि विशेषताओं की बात करें तो उनकी विशेषताएं हम शब्दों में नहीं बता सकते हैं| परंतु कुछ विशेषताएं अधोलिखित हैं
- उनकी गहरी भक्ति भावना और ईश्वर के प्रति प्रेम समर्पणयह बताता है कि यह ईश्वर के लिए अटूट प्रेमके लिए इस दुनिया में जन्म लिए थे |
- यदि दूसरी विशेषता की बात करें तो समझ में फैली हुई कुरीतियों को इन्होंने जड़ से खत्म करने का बहुत प्रयास किया था | छुआ छूत की भावना का विरोध इनके द्वारा किया गया
प्रश्न- रैदास पाठ से हमें क्या शिक्षा मिलती है?
उत्तर-रैदास पाठ से हमें कई महत्वपूर्ण शिक्षाएं मिलती हैं|
- पहले शिक्षा यह है कि सभी मनुष्य समान है और किसी के साथ भेदभाव नहीं करना चाहिए
- दूसरी शिक्षा सच्ची भक्ति दिल से की जाती है और बाहरी दिखावे के लिए कोई भी चीज भगवान के पासनहीं पहुंचती अर्थातबाहर ही दिखावे का कोई भी महत्व नहीं है |
- तीसरी शिक्षा यह है कि मनुष्य को अपने जीवन में अच्छे कर्म करने चाहिए और दूसरों के साथ प्रेम और सम्मान से रहना चाहिए|
इस प्रकार यह पाठ हमें मानवता समानता और सच्ची भक्ति का मार्ग दिखाता है|
